
उदयपुर. नगर निगम द्वारा झीलों की सफाई में उपयोग हो रही डिवीडिंग मशीन के संचालन और रखरखाव पर हुए खर्च की जानकारी को “लोकहित में नहीं” बताते हुए देने से इनकार कर दिया गया है। इस फैसले ने न केवल पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर भी बहस छेड़ दी है।झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने 5 जनवरी, 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन कर जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक नई डिवीडिंग मशीन के संचालन और मेंटनेंस पर हुए कुल खर्च की जानकारी मांगी थी। करीब तीन माह बाद 23 मार्च को निगम की ओर से जवाब मिला कि यह जानकारी “सृजनात्मक एवं व्यापक लोकहित में नहीं” होने के कारण उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। पालीवाल को एक ही तरह की भाषा में दो अलग-अलग पत्रों के माध्यम से यही जवाब दिया गया।———