
सीएस और डीजीपी के साथ वे स्वयं उदयपुर आए। परिवार से बातचीत की। चंद घंटों में आरोपियों को पकड़ा। आजादी के बाद यह पहला केस है, जिसमें परिवार को इतना बड़ा पैकेज दिया, जिसमें दोनों बच्चों को नौकरी और 51 लाख रुपए शामिल है। तत्कालीन विपक्ष, जिसमें गुलाबचंद कटारिया भी शामिल थे, उन्होंने भारी गलती की और केस एनआइए को दिलवा दिया। गहलोत ने कहा, एनआइए एक विश्वसनीय एजेंसी है, लेकिन इतने संगीन मामले में ऐसी लापरवाही समझ में नहीं आ रही।