
झीलों और पहाड़ियों को बचाने के लिए प्रशासन का सख्त रुख
उदयपुर. झीलों की नगरी उदयपुर में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर अब प्रशासन सख्ती करेगा। प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों, रिसॉर्ट, अस्पतालों और अवैध खनन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय मंगलवार को जिला पर्यावरण समिति की त्रैमासिक बैठक लिया गया। इस अवसर जिला कलक्टर नमित मेहता ने कहा कि उदयपुर की पहचान सिर्फ इसके गौरवशाली इतिहास से ही नहीं, बल्कि यहां की झीलों और प्राकृतिक पर्यावरण से भी है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसे नुकसान पहुंचाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि औद्योगिक इकाइयों, रिसॉर्ट और अस्पतालों की लगातार निगरानी रखी जाए तथा प्रदूषण फैलाने की गतिविधि सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। प्रारंभ में समिति के सदस्य सचिव उप वन संरक्षक (उत्तर) अजय चित्तौड़ा ने गत बैठक कार्यवाही की पालना रिपोर्ट प्रस्तुत की। परिवहन, युडीए, नगर निगम, यातायात पुलिस, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रिको , खनन आदि विभागों के अधिकारियों ने गत तीन माह की कार्यवाही का विवरण रखा। बैठक में युडीए सचिव हेमेंंद्र नागर, उप वन संरक्षक वन्यजीव यादवेंद्रसिंह चुण्डावत, सीएमएचओ डॉ अशोक आदित्य, सहायक वन संरक्षक सुरेखा चौधरी, उपाधीक्षक यातायात अशोक आंजना सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।