

अब हल्दीघाटी भी जानी जाती है, पोखरगढ़ भी जाना जाता है और चावंड भी। मायरे की गुफा थी कि नहीं? तुम्हें इतने साल दिखती थी? वहां तक पहुंचने के लिए सड़क बनाई। उदय सिंहजी की छतरी यहां बनाई। इस बात को कौन याद रखता है?
हम लोगों का काम करने का तरीका जनता के लिए है, हमारे लिए नहीं है। आपका पैसा आप तक पहुंचाते हैं। उन्होंने बीएपी पर भी निशाना साधा। बोले, वो कहते हैं कि हिंदू नहीं हैं। तो तू कहां से आया रे, महाराणा प्रताप की सेना में? अगर तू यहां का आदिवासी नहीं होता, भीलू राणा नहीं होता तो क्या राणा युद्ध लड़ सकता था?