
यह मामला यातायात पुलिस के ई-चालान सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है, जहां केवल नंबर प्लेट के आधार पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि वाहन के मॉडल और अन्य पहचान की पुष्टि नहीं की जा रही। इस तरह की चूक से न सिर्फ निर्दोष लोगों को परेशानी होती है, बल्कि फर्जी नंबर प्लेट के जरिए अपराधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।