
बताया जा रहा है कि नरेश अपने परिवार में पढ़ाई करने वाला इकलौता बेटा था। उसके पिता मजदूरी कर किसी तरह उसे पढ़ा रहे थे, ताकि वह पढ़-लिखकर परिवार की स्थिति बेहतर बना सके। नरेश का बड़ा भाई पढ़ा-लिखा नहीं है, इसलिए परिवार की उम्मीदें भी उसी से जुड़ी हुई थीं।