एक साल में निखरेगा स्वरूप : 5.24 करोड़ से होगा जावर माता मंदिर का कायाकल्प | Devlopment



एक साल में निखरेगा स्वरूप : 5.24 करोड़ से होगा जावर माता मंदिर का कायाकल्प | Devlopment

जावर माता को महिषमर्दिनी रूप में पूजा जाता है, जिन्हें स्थानीय रूप से धातु (खनिज) की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। मंदिर का निर्माण लगभग 10वीं सदी का माना जाता है, इसमें वैष्णव स्थापत्य शैली की झलक मिलती है। मान्यता है कि जावर की खानों से निकली धातु ने मेवाड़ की आर्थिक समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लोककथाओं के अनुसार देवी ने भक्त को धातु प्राप्ति का रहस्य बताया, जिससे क्षेत्र में संपन्नता आई। जावर की धातु और सिक्कों की ख्याति देश-विदेश (टक्क, लाट, कर्नाटक, बसरा, चीन) तक रही।——-



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