
डॉ. चौहान के अनुसार सर्पदंश के बाद कई लोग अस्पताल जाने के बजाय मंदिर, देवरा या झाड़-फूंक करने वाले बाबाओं के पास चले जाते हैं, इससे इलाज में देरी होती है और कई बार मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि सांपों के जहर में हीमोटॉक्सिन और न्यूरोटॉक्सिन जैसे तत्व होते हैं, जिनके असर से पहले इलाज का पर्याप्त समय मिल जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सांप कभी भी बिना कारण इंसान पर हमला नहीं करते, बल्कि केवल अपने बचाव में डसते हैं।