

जानकारी के अनुसार, 70 परिवारों के 400 से अधिक लोग पिछले 18 वर्षों से अपने गांव वापस नहीं जा सके हैं। पलायन करने वाले परिवार गुजरात, सिरोही, जालोर और सुमेरपुर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में मजदूरी कर किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं। कई परिवार सड़क किनारे झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं और बच्चों की पढ़ाई भी बीच में ही छूट चुकी है।