

देवास परियोजना के तृतीय एवं चतुर्थ चरण से उदयपुर शहरवासियों की दशकों तक प्यास बुझाई जा सकेगी। जन स्वास्थ्य अभियान्त्रिकी विभाग के अनुसार 2031 में शहर की जनसंख्या 875874 तक होने की संभावना है, जिसके लिए साल में 2397 एमसीएफटी पानी चाहिए। पर अभी 1738 एमसीएफटी पेयजल ही उपलब्ध है। यह मांग 2036 तक 2613 एमसीएफटी हो जाएगी। इसलिए पेयजल मांग की पूर्ति के लिए देवास तृतीय एवं चतुर्थ परियोजना तैयार की है।देवास तृतीय परियोजना के अन्तर्गत गोगुन्दा तहसील के नाथियाथाल गांव के पास 703 एमसीएफटी क्षमता का देवास तृतीय बांध बनेगा, इससे 11.04 लम्बी सुरंग का निर्माण कर देवास द्वितीय (आकोदडा बांध) में जल अपवर्तन किया जाएगा। पूर्व निर्मित आकोदडा बांध एवं सुरंग से पिछोला झील में जल अपवर्तन होगा। देवास चतुर्थ परियोजना के अन्तर्गत गोगुन्दा तहसील के अम्बावा गांव के निकट 390 एमसीएफटी क्षमता का देवास चतुर्थ बांध का निर्माण कर इससे 4.3 किमी सुरंग का निर्माण कर देवास तृतीय बांध से जोड़ा जाएगा। देवास तृतीय एवं चतुर्थ के लिए 156.18 हैक्टेयर वन भूमि तथा 133.45हैक्टेयर निजी भूमि अधिग्रहित की है। देवास तृतीय एवं चतुर्थ परियोजना की अनुमानित लागत 1690.55 करोड है। यह कार्य 44 माह में पूरा करने का लक्ष्य है। इससे उदयपुर शहर की झीलों को प्रतिवर्ष 1000 एमसीएफटी अतिरिक्त पानी मिलेगा।
हैदराबाद की कंपनी को बनानी है सुरंग