

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर के निकट बसे मदार गांव की हर्षिता पुष्करणा की कहानी उन बेटियों के लिए प्रेरणा है जो अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हैं। न पढ़ाई में अव्वल, न खेलकूद में रुचि, न हिंदी-अंग्रेजी पर पकड़। हर्षिता को बस अपनी मेवाड़ी बोली से मोह था। यही मोह आगे चलकर उसकी ताकत बना और उसने साबित कर दिया कि जुनून और मेहनत हो तो रास्ते खुद बन जाते हैं।
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