

भट्ट ने कहा- ‘मैंने ढाई महीने काटे हैं उदयपुर की जेल में और मुझे उम्मीद नहीं मुझे यकीन था कि यहां की जो कानून व्यवस्था है और जो सच्चाई है वो जरूर उभर के आएगी। जेल के अंदर मेरे एक मित्र बने, जिसने मुझे मेवाड़ की मिट्टी की तासीर के बारे में बताया और उसने कहा कि ये मेवाड़ है। यहां सत्य परेशान हो सकता है, सत्य पराजित नहीं हो सकता। तो वही मेवाड़ की मिट्टी का टीका लगा के जा रहा हूं मैं।’