

वह रैक, जो सामान रखने के लिए बनी थी, उस कर्मचारी के लिए कुछ पलों का ‘बिस्तर’ बन गई। यह इस बात का प्रमाण है कि इंसान की शारीरिक क्षमता की भी एक सीमा होती है। जब शरीर जवाब दे देता है, तो उसे लग्जरी बेड नहीं, बस चंद लम्हों का सुकून चाहिए होता है, चाहे वह लोहे की रैक ही क्यों न हो।