

पुलिस जांच में पीड़िताओं के मेडिकल परीक्षण, उम्र संबंधी दस्तावेज, घटनास्थल का निरीक्षण, एफएसएल रिपोर्ट और गवाहों के बयान जुटाए। अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक महेंद्र ओझा ने सभी साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को संदेह से परे साबित किया। उन्होंने 17 गवाह और 48 दस्तावेज पेश किए।