

रोत ने कहा कि कटारा को आरपीएससी सदस्य बनाने की सिफारिश करने वाले नेताओं की भूमिका अब संदेह के घेरे में है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ईडी के बयानों में नेताओं के नाम सामने आए हैं, तो फिर कार्रवाई केवल एक व्यक्ति तक सीमित क्यों है जो चुप हैं, वही दोषी हैं।
रोत ने कहा- मैं यह नहीं कहता कि हर सिफारिश करने वाला दोषी है लेकिन जो आज चुप हैं, उनकी चुप्पी बहुत कुछ बयां करती है। उन्होंने उदयपुर देहात कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा, डूंगरपुर के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश खोड़निया और पूर्व मंत्री अर्जुन बामनिया का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि यही वे चेहरे हैं, जिन्होंने कांकरी डूंगरी प्रकरण को अंजाम दिया और आज कटारा को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
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सांसद रोत ने महेंद्रजीत सिंह मालवीया पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में रहते हुए जिन पर गंभीर आरोप लगे, वे भाजपा की वॉशिंग मशीन में धुलकर साफ हो गए और अब फिर कांग्रेस में लौट आए हैं। उन्होंने कहा- मालवीय कहां जाएं, इससे हमें फर्क नहीं पड़ता लेकिन सवाल तो बनता है।
रोत ने कहा कि बाबूलाल कटारा का आरपीएससी सदस्य बनना आदिवासी क्षेत्र के लिए गर्व की बात थी लेकिन गिरफ्तारी के बाद पूरा नैरेटिव यह बनाया गया कि एक आदिवासी अधिकारी ही भ्रष्ट है, जबकि जिन राजनीतिक चेहरों का पेपर लीक से सीधा या परोक्ष संबंध था, उन्होंने उससे दूरी बना ली। उन्होंने कहा कि बाबूलाल कटारा को आरपीएससी सदस्य बनाना सामाजिक नहीं बल्कि शुद्ध राजनीतिक फैसला था। रोत के अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दिए गए ब्रीफ नोट में यह बात स्पष्ट रूप से लिखी गई थी कि कांकरी डूंगरी प्रकरण को शांत कराने में कटारा की अहम भूमिका रही।
भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए रोत ने कहा कि जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली डबल इंजन सरकार यह बताए कि इस घोटाले में शामिल नेताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या इसमें आरपीएससी चेयरमैन और अन्य सदस्य शामिल नहीं थे? उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस पूरे मामले का खुलासा नहीं करते, तो सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।