

सुनवाई के दौरान विशिष्ट लोक अभियोजक राजेश पारीक ने तर्क दिया कि आरोपी एक लोकसेवक होकर छात्र से रिश्वत मांगने का दोषी है, इसलिए उसे कठोर दंड दिया जाना जरूरी है। न्यायालय ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए लिखा कि वर्तमान में लोक सेवकों द्वारा अपने पदीय कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन न कर भ्रष्ट आचरण अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। ऐसी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाया जाना नितांत आवश्यक है। अदालत ने कहा कि शिक्षक द्वारा अपने ही संस्थान के छात्र से अंक बढ़ाने के बदले रिश्वत लेना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में दंड दिया जाना न्यायोचित होगा।