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विरोध कर रहे शिक्षकों का कहना है कि नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के नियमों के अनुसार 220 से अधिक बेड वाले सरकारी मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर स्तर तक की नियुक्ति केवल नियमित चयन प्रक्रिया से ही हो सकती है। प्रोफेसर स्तर पर सीधी नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद सरकार का यह आदेश नियमों के विपरीत है।
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शिक्षकों ने आरोप लगाया कि लेटरल एंट्री से न केवल चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी, बल्कि पारदर्शिता और शैक्षणिक माहौल पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के सचिव तरुण रलोत ने कहा कि संगठन ने सरकार से इस आदेश को तुरंत निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने हिस्सा लिया और सरकार से नियमों का पालन सुनिश्चित करने की अपील की।
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