

इनमें से कई एमएससी और बीएड कर व्याख्याता बनने की तैयारी में थे। किसी ने सब-इंस्पेक्टर, पटवारी, वीडियो या ईओ/आरओ जैसी परीक्षाओं में मुख्य चरण और साक्षात्कार तक का सफर तय किया, पर कुछ मामूली नंबरों से सफल नहीं हो पाए। रोजगार की अनिश्चितता और भर्ती परीक्षाओं के लंबे खिंचने के कारण इन युवाओं ने इस पद को स्वीकार किया।