पूर्व सीएम ने कहा, ‘मैं बार-बार मांग कर रहा हूं कि छात्र संघ चुनाव होने चाहिए। हमने बस छात्र संघ चुनाव स्थगित किए थे, हमें उम्मीद थी सरकार हमारी बनेगी, बनते ही पहला काम करेंगे चुनाव करवा लेंगे, सरकार नहीं बन पाई, अब ये इनको बहानेबाजी नहीं करनी चाहिए।’
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने कहा है कि अगर यमुना का पानी राजस्थान आता है तो वास्तव में बहुत खुशी की बात होगी और ऐसा होने पर वह इसके लिए मुख्यमंत्री भजनलाल को माला पहनाएंगे। गहलोत ने यह बात बुधवार सुबह दो दिवसीय दौरे पर बीकानेर पहुंचने पर मीडिया से बातचीत के दौरान कही। उन्होंने कहा ‘मुख्यमंत्री खुद ही डेढ़ साल से बोल रहे हैं यमुना का पानी लाएंगे, एग्रीमेंट हो गया है, डीपीआर बन रही है तब मैंने कहा कि अगर पानी आता है वास्तव में तो बहुत खुशी की बात होगी, और अगर ऐसा हो गया तो मैं खुद जाकर उन्हें माला पहनाऊंगा।’
इस दौरान राज्य में छात्र संघ चुनावों की मांग के सवाल पर उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव होने चाहिए, लगता है नई शिक्षा नीति से ध्वनि निकल रही है कि राजनीतिक गतिविधियां होनी नहीं चाहिए जबकि जितने नेता निकले हैं अरुण जेटली सहित जो विपक्ष में थे भाजपा के थे, कितने नेता निकले हैं जो छात्र राजनीति से केंद्र तक पहुंचे हैं, राज्यों तक पहुंचे हैं, मंत्री एवं मुख्यमंत्री बने हैं, बस ये सिलसिला चलता रहे।
उन्होंने कहा ‘मैं बार-बार मांग कर रहा हूं कि छात्र संघ चुनाव होने चाहिए। हमने छात्र संघ चुनाव स्थगित किए थे खाली, हमें उम्मीद थी सरकार हमारी बनेगी, बनते ही पहला काम करेंगे चुनाव करवा लेंगे, सरकार नहीं बन पाई, अब ये बहानेबाजी इनको नहीं करनी चाहिए।’
सीएम भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की दिल्ली यात्रा को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘ये पार्टी के अंदरूनी मामले हैं जबसे धनखड़ साहब का एपिसोड हुआ है तब से गवर्नमेंट खुद डिफेंस में आ गई है। इस संवैधानिक पद पर बैठे हुए धनखड़ साहब से कांग्रेस को बहुत शिकायतें रही हैं, अन्य विपक्षी पार्टियों की भी रही है, परंतु धनखड़ साहब को जिस तरह से मजबूर किया गया, उन्होंने खुद इस्तीफा दिया या उनसे इस्तीफा दिलवाया गया, ये तमाम बातें रहस्य बनी हुई हैं।
आगे उन्होंने कहा, ‘संवैधानिक पदों पर जो बैठते हैं एक पार्लियामेंट के मेंबर भी इस्तीफा देता है तो वह कुछ स्पष्टीकरण देता है। लेकिन देश के अंदर उपराष्ट्रपति जी का इस्तीफा हो गया, आज इतने दिन हो गए हैं और अभी तक भी ना तो वह कुछ बोले और न उन्होंने प्रेस से बात करी है। न सरकार ने कुछ बताया है कि हमारे उपराष्ट्रपति चुने हुए थे उन्होंने किन कारणों से इस्तीफा दिया, क्या सरकार नाराज़ थी या नाइत्तफाकी थी मंत्रियों के बीच में या प्राइम मिनिस्टर के बीच में या धनखड़ साहब के बीच में, किसी को कुछ नहीं मालूम और वो अभी मौन धारण किए हुए हैं।’
(वार्ता इनपुट के साथ)