
देश का 90 फीसदी मार्बल उत्पादन और 95 फीसदी जिप्सम उत्पादन यहां होता है। साथ ही चूना पत्थर, ग्रेनाइट, वोलास्टोनाइट, बॉक्साइट और लौह अयस्क भी यहां के अहम खनिज है। ऐसे में सीमेंट और स्टील उद्योग को कच्चा माल, निर्माण क्षेत्र को मजबूती, लाखों लोगों को रोजगार, निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जन, स्थानीय स्तर पर उद्योगों का विकास की गतिविधियां हैं।
भूजल और जल प्रबंधन में भूमिका
देश की करीब 60 फीसदी सिंचाई भूजल पर निर्भर है। कई शहरों में 70–80 फीसदी पेयजल का स्रोत भूजल से ही है। भूजल के भंडार और उपलब्धता का आकलन भूवैज्ञानिक करते हैं। जल संकट से निपटने में वैज्ञानिक योजना तैयार करते हैं। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जल स्रोतों की पहचान में मदद करते हैं।
आपदा प्रबंधन और सुरक्षित निर्माण
भू वैज्ञानिक भूकंप, भूस्खलन और बाढ़ के जोखिम का अध्ययन, बड़े प्रोजेक्ट्स से पहले भूमि की वैज्ञानिक जांच, बांध, सुरंग, हाइवे और स्मार्ट सिटी में अहम योगदान देते हैं। साथ ही अस्थिर क्षेत्रों की पहचान कर हादसों की संभावना कम करने, आपदा पूर्व चेतावनी और जोखिम प्रबंधन में सहयोग करते हैं।-
राजस्थान की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार इसके खनिज संसाधन हैं, और इन संसाधनों की पहचान व वैज्ञानिक उपयोग में भूवैज्ञानिकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। आज जब संसाधनों का दबाव बढ़ रहा है, तब जरूरी है कि हम सतत खनन और पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों को अपनाएं। भूवैज्ञानिक न केवल संसाधन खोजते हैं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए उनके संतुलित उपयोग की दिशा भी तय करते हैं।
डॉ. गोविंद सिंह भारद्वाज, पूर्व प्रोफेसर, सीटीएई एमपीयूएटी उदयपुर