Udaipur: बेटियों की जिद बनी प्रेरणा, 40 साल बाद थामा किताबों का साथ, 68 साल की उम्र में विधायक ने दी परीक्षा
Udaipur: बेटियों की जिद बनी प्रेरणा, 40 साल बाद थामा किताबों का साथ, 68 साल की उम्र में विधायक ने दी परीक्षा


उदयपुर: ‘सीखने की कोई उम्र नहीं होती’ इस कथन को उदयपुर ग्रामीण से 68 वर्षीय भाजपा विधायक फूल सिंह मीणा ने साकार कर दिखाया है। महज 15 वर्ष की उम्र में पढ़ाई छोड़ने वाले जनप्रतिनिधि ने चार दशक बाद फिर से शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया और 68 वर्ष की आयु में परीक्षा देकर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है।

बेटियों ने पढ़ाई के लिए किया प्रेरित

इस प्रेरणादायी सफर की सबसे बड़ी वजह उनकी बेटियां बनीं, जिन्होंने पिता को दोबारा पढ़ाई शुरू करने के लिए प्रेरित किया। बेटियों की जिद और विश्वास ने उस अधूरे सपने को फिर से जगा दिया, जो वर्षों पहले परिस्थितियों के कारण छूट गया था। विधायक ने बताया कि कम उम्र में पारिवारिक जिम्मेदारियों और आर्थिक परिस्थितियों के चलते उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। राजनीति और सामाजिक जीवन में सक्रिय रहते हुए उन्होंने हमेशा शिक्षा के महत्व को समझा, लेकिन दोबारा पढ़ाई शुरू करने का साहस अब जाकर जुटा।

डिग्री से ज्यादा जरूरी जज्बा: मीणा

परीक्षा देने के बाद मीडिया से बातचीत में विधायक फूल सिंह मीणा ने कहा कि डिग्री से ज्यादा जरूरी जज्बा होता है। यदि मन में सीखने की ललक हो, तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती। उनकी इस पहल ने विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और उन युवाओं को प्रेरित किया है, जो किसी कारणवश अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं। विधायक की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति नई जागरूकता का संदेश भी है, जो बताता है कि ज्ञान का रास्ता कभी बंद नहीं होता।

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लोगों ने सराहा विधायक का प्रयास

स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने विधायक के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच को और मजबूत करेगा। विशेष रूप से बेटियों की भूमिका ने यह साबित कर दिया कि वे परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की दिशा बदलने में सक्षम हैं।



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