

लक्ष्यराजसिंह ने कहा कि पिता की गैर मौजूदगी का सन्नाटा है। उनका आशीर्वाद हौसला देता है। दादा भगवत सिंह की सोच से फाउंडेशन सम्मान की नींव रखी। हमारी संस्कृति ही है, जिससे लोगों को प्रेरित करना चाहते हैं। डेढ़ सौ साल पहले बालिका शिक्षा को बढ़ावा मेवाड़ की सोच रही है। डॉ. मॉली ने कहा कि यहां के धर्म, भाषा, संबंधों में भी अलग रूप और रंग का इतिहास है। पुनीत चटवाल ने पर्यटन क्षेत्र में मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की सराहना की।