

इस समय निजी और कॉरपोरेट हेल्थ इंश्योरेंस का बड़ा हिस्सा निजी अस्पतालों को जाता है। प्रस्तावित मॉडल के तहत यदि सरकारी मेडिकल कॉलेज और बड़े जिला अस्पताल टीपीए या पीपीएन नेटवर्क से जुड़ते हैं, तो बीमा कंपनियों से मिलने वाला राजस्व सीधे सरकारी अस्पतालों को मिलेगा। यह राशि अस्पताल विकास निधि (आरएमआरएस) में जमा होगी। उसी पैसे से क्रिटिकल केयर, आधुनिक उपकरण, डिजिटल हेल्थ और स्वच्छता सुविधाएं मजबूत की जाएंगी।