

माइक्रोस्कोपिक विश्लेषण और रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी से पता चला कि इन गोलकों में लोहा, कार्बन और सल्फर के सूक्ष्म निशान हैं, जो यह दर्शाते हैं कि इनकी संरचना रासायनिक रूप से विकसित हुई है, न कि केवल जैविक या भौतिक घर्षण से। भूगर्भ विज्ञानी पुरोहित का कहना है कि ऐसी चट्टानें जियो-हेरीटेज साइट के रूप में संरक्षित की जानी चाहिए।