

किसी गांव में लोक आस्था के चलते लोग होली पर अपना गांव छोड़ देते हैं, तो कहीं भगवान खुद अपनी ससुराल में होली खेलने जाते हैं। मेवाड़ की परंपरागत होली से लेकर ब्रज के लट्ठमार रंग तक, और हाड़ौती के हिरण्यकश्यप दहन से लेकर मारवाड़-सिंध की ‘हाट’ परंपरा तक हर इलाके की अलग और अनूठी छटा है। आइए, एक नजर डालते हैं अजब-गजब होली परंपराओं पर, जो आधुनिकता के इस दौर में भी सांस्कृतिक जड़ों की गहराई से जुड़ी हुई हैं।