

यह संक्रमण काल है। यह वही समय है, जब मौसम के साथ तालमेल बैठाने में सावधानी की जरूरत होती है। यह दौर सर्दी से गर्मी की ओर बढ़ने का प्राकृतिक चरण है, जिसमें तापमान में बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं होता, लेकिन हवा का मिजाज बदलने लगता है। यह मौसम सर्दी-जुकाम, एलर्जी और वायरल संक्रमण के लिहाज से संवेदनशील होता है, इसलिए लापरवाही से बचना जरूरी है। अब खानपान में बदलाव करना चाहिए।
डॉ. राजीव कुमार पांडे, प्रोफेसर (पंचकर्म), आयुर्वेद कॉलेज