

मेहुल की पढ़ाई-लिखाई गांव गोठड़ा और आसपुर में ही हुई। परिजनों की इच्छा पर बांसवाड़ा से बीएड किया। रीट परीक्षा भी दी, पर सफलता नहीं मिली। इसके बाद घरवालों ने अन्य भर्तियों की तैयारी करवाना चाहा, मगर मेहुल के मन में अब सरकारी नौकरी की राह कहीं गायब हो चुकी थी। उसे समझ आ गया कि रास्ता वही सही है, जो दिल कहे और दिल कला की ओर खिंच रहा था।