

राजेश ने अरावली में पाए जाने वाले जामुन, आंवला जैसे फलों पर काम बढ़ाया। जामुन के बीज, पाउडर, क्यूब, जैम और टी पाउच जैसे उत्पाद तैयार किए। औषधीय गुणों से भरपूर इन उत्पादों को पसंद किया जाने लगा और विदेशों से भी डिमांड बढ़ी। आज यह पहल 48 आदिवासी गांवों की करीब 5000 महिलाओं के लिए आजीविका का मजबूत आधार बन चुकी है। जंगलों से फल संग्रहण, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग तक महिलाएं सीधे जुड़ी हैं।