
उदयपुर. लेकसिटी को ग्रीन सिटी भी कहा जाता है। कारण फाइलों में नगर निगम के नाम से 179 पार्क दर्ज हैं। हालांकि इन पार्कों में से आधे की ही देखरेख हो रही है। निगम ने 90 पार्क गोद दे रखे हैं, जिनकी देखरेख के लिए हर समिति को 4 से 5 हजार रुपए प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि दी जाती है। बाकी पार्कों की हालत भी ठीक नहीं है। कहीं झाड़-झंखाड़ हैं, कहीं सफाई के बाद फिर वही हालात। कहीं पार्क के नाम पर छोड़ी गई जमीन आज भी विकसित होने का इंतजार कर रही है। अब नगर निगम चुनाव में यही पार्क सड़क, नाली और सफाई के साथ स्थानीय मुद्दा बनने लगे हैं। हाल ही सरकार और न्यायालय के निर्देशों के बाद निगम ने पार्कों की सुध ली और वहां सफाई करवाई। लेकिन सवाल यह है कि सिर्फ सफाई करवाने मात्र से पार्क विकसित हो जाएंगे या उनकी नियमित देखरेख की भी व्यवस्था होगी? निवर्तमान पार्षदों पर भी आरोप लगते रहे हैं कि उन्होंने अपने वार्डों में पार्क विकसित कराने, बदहाल पार्कों को दुरुस्त कराने और अधिक से अधिक पार्कों को गोद दिलाने को प्राथमिकता नहीं दी।
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