Udaipur News: एक मिलीमीटर में सिमटी ये कला, पर छिपा है इसमें बड़ा संदेश, डॉ. सक्का की उपलब्धि फिर चर्चा में
Udaipur News: एक मिलीमीटर में सिमटी ये कला, पर छिपा है इसमें बड़ा संदेश, डॉ. सक्का की उपलब्धि फिर चर्चा में


उदयपुर के सूक्ष्म शिल्प कलाकार और विश्व रिकॉर्डधारी डॉ. इकबाल सक्का एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने सोने से बनी ऐसी सूक्ष्म कलाकृतियां तैयार की हैं, जो जितनी छोटी हैं, उतना ही बड़ा सामाजिक संदेश देती हैं। डॉ. सक्का ने मात्र 1 मिलीमीटर आकार की पांच स्वर्ण कलाकृतियां बनाई हैं, जिनमें केसरिया झंडा, ओम, काली टोपी, डंडा और दीपक शामिल हैं। उनका कहना है कि यह तोहफा किसी संस्था को नहीं, बल्कि उस विचार को समर्पित है जो समाज को जोड़ने का काम करता है।

सक्का का मानना है कि कला की असली चमक सोने में नहीं, बल्कि सोच में होती है। वे कहते हैं, कि कला का धर्म सृजन है, और जब सृजन में भावना जुड़ जाए, तो वह किसी भी दीवार से बड़ा हो जाता है। इन कलाकृतियों को तैयार करने में उन्हें पांच दिन लगे। काम इतना सूक्ष्म था कि हर डिजाइन के लिए माइक्रो टूल्स और हाई-मैग्नीफिकेशन लेंस का सहारा लेना पड़ा। उनका दावा है कि ये दुनिया की अब तक की सबसे छोटी सोने की कलाकृतियां हैं, जिन्हें वे जल्द ही विश्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने जा रहे हैं।

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हालांकि, उनके लिए यह सिर्फ रिकॉर्ड बनाने की बात नहीं है। वे कहते हैं कि मैं इस कला के ज़रिए यह दिखाना चाहता हूं कि समाज को जोड़ने वाले विचार, चाहे कितने भी छोटे क्यों न दिखें, उनका असर सोने से भी ज्यादा कीमती होता है। बचपन से कुछ अलग करने की चाह रखने वाले डॉ. सक्का इससे पहले भी दुनिया की सबसे छोटी सोने की चेन, स्वर्ण चाय की केतली और क्रिकेट स्टाम्प बना चुके हैं। उनकी कला को गिनीज, लिम्का, एशिया और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान मिल चुका है।

डॉ. सक्का की यह नई रचना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष को समर्पित है। हालांकि वे इसे मात्र श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक सांकेतिक कला संदेश मानते हैं, जो समाज में सेवा, एकता और संयम की भावना को उजागर करता है।



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