
मुआवजे के तौर पर करीब 25 हजार रुपए फैक्ट्री की तरफ से दिए गए थे, लेकिन जब वो काम पर लौटा तो उसकी सैलरी में से मुआवजे की राशि हर महीने किस्त के रूप में काट ली गई थी। इस घटना के बाद फैक्ट्री मालिकों और परिवार के बीच वार्ता हुई। इस दौरान परिवार को 11 लाख रुपए देना तय हुआ है। इसके बाद लोगों ने धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
