
वीडियो में उन्होंने कहा कि मेरे बयान से मेवाड़ की जनता और राजपूत समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची है, इसके लिए मैं सर्वसमाज से क्षमा मांगती हूं। मेरा इरादा किसी को आहत करने का नहीं था। कुलपति ने यह भी दावा किया कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। उन्होंने कहा कि मैं अहिन्दी भाषी हूं, जिसके कारण मेरे वक्तव्य को गलत समझा गया। यदि मेरे पूरे बयान को सुना जाए, तो स्पष्ट होगा कि मैंने औरंगजेब की प्रशंसा नहीं की।
