
उदयपुर एसपी योगेश गोयल ने बताया कि मृतक नवीन कुछ दिन पहले गांव के ही युवकों से विवाद में उलझ गया था। इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने उसकी रैकी की और घात लगाकर उस पर हमला कर दिया। 12 अगस्त की रात को नवीन अपने साथियों के साथ बस स्टैंड से घर लौट रहा था। तभी मालीफला पंचायत पूज के पास 10 से 15 हथियारबंद बदमाश पहले से छिपे बैठे थे। आरोपियों ने नवीन की गाड़ी रुकवाई और उसे बाहर खींचकर कुल्हाड़ी, चाकू, लोहे की रॉड, बीयर की बोतल और लात-घूसों से बेरहमी से पीटा। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद से आरोपी फरार थे। पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही थीं और आखिरकार सभी छह को खडकाया गांव के जंगलों से पकड़ लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में बालकृष्ण पिता अमृतलाल, शैलेश कुमार पिता जीवा, ब्रजेश पिता लक्ष्मण, धर्मेन्द्र कुमार पिता थावरचंद, गणेशलाल पिता अरजी और सरकारी शिक्षक जहेश पिता अमृतलाल शामिल हैं।
आपराधिक रिकॉर्ड से उठे सवाल
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी बालकृष्ण पहले भी पोक्सो मामले में नामजद हो चुका है। शैलेश और धर्मेन्द्र पर मारपीट के दो-दो केस दर्ज हैं, जबकि गणेशलाल पर भी मारपीट का केस दर्ज है। ऐसे में सवाल उठता है कि लगातार अपराध में संलिप्त लोग खुलेआम घूमते रहे और आखिरकार हत्या जैसी बड़ी वारदात को अंजाम दे डाला।
शिक्षक की संलिप्तता पर हैरानी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक सरकारी शिक्षक भी है। जिस पद पर बैठकर समाज को शिक्षा और संस्कार देने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए, वहां हिंसा और हत्या में लिप्त होना ग्रामीणों के लिए बेहद चौंकाने वाला है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ सरकारी सेवा से बर्खास्तगी की कार्यवाही भी होनी चाहिए।
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गांव में दहशत, परिवार का बुरा हाल
इस हत्या से पूरे गांव में दहशत का माहौल है। मृतक के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने आरोप लगाया कि यदि पुलिस पहले से सक्रिय होती और इन अपराधियों पर निगरानी रखी जाती, तो शायद नवीन की जान बच सकती थी।
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